3:04 pm Tuesday , 18 August 2026
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जयचंद हमेशा हर काल में – प्रियंका विवेक सिंह

जयचंद हमेशा हर काल में रहा हैं
इतिहास केवल तिथियां और युद्धों की कथा नहीं, यह मानव विविधता के साथ उनके स्वभाव का भी आईना रहा है। उसमें हम वीरता, त्याग ,बलिदान ,प्रेम के साथ-साथ विश्वास घात की भी कथाओं का उल्लेख पाते हैं।
भारत के इतिहास के संदर्भ में अगर जयचंद की बात की जाए तो वह एक व्यक्ति विशेष ना होकर आधुनिक समय में विश्वास घात और देशद्रोह का प्रतीक बन चुका है एक ऐसा प्रतीक जो समय ,काल, परिस्थितियों के अनुसार नाम तो बदला लेकिन वह हमेशा जिंदा रहा ।
हमारे देश में भी राजनीति के बाहर भीतर बहुत से जयचंद है जो अपने निजी स्वार्थ के लिए गद्दारी पर उतर आते हैं।
हमें तय करना होगा हम किस ओर खड़े हैं धोखे की छाया में या विश्वास की रोशनी में। जयचंद की पहचान जरुरी है पर उससे ज्यादा जरूरी है सत्य के रक्षकों को सशक्त और मजबूत बनाना। तभी इतिहास के पन्नों में जयचंदों की जगह सीमित होगी और उन्हें धीरे-धीरे निष्क्रिय किया जा सकता है, जिससे हमारा देश विकास करें और निरंतर आगे बढ़ता रहे।
प्रियंका विवेक सिंह

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