


बदायूं में दो पूर्व विधायक, एक पूर्व सांसद समेत कई चेहरे थाम चुके हैं साइकिल, सीएम ने तीन विधायकों को भी किया तलब।
उझानी बदांयू 30 अक्टूबर।
विधानसभा चुनाव 2027 नजदीक आते ही बदायूं जिले में सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा में इन दिनों ‘छोड़ो अभियान’ सा चल रहा है। दातागंज के पूर्व विधायक सिनोद शाक्य और बिसौली के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर समेत आंवला के दो बार के सांसद धर्मेंद्र कश्यप के सपा में जाने के बाद भाजपा का कुनबा हिल गया है। ऐसे सियासी भूचाल के बीच पूर्व मंत्री विमल कृष्ण अग्रवाल का लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलना महज औपचारिक मुलाकात नहीं माना जा रहा।
मिली जानकारी के अनुसार बीते दिवस पूर्व मंत्री विमल कृष्ण अग्रवाल लखनऊ पहुंचे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। फूलों का गुलदस्ता देकर उन्होंने सीएम का अभिवादन किया। करीब 20 मिनट तक बंद कमरे में दोनों के बीच बातचीत हुई।
बताया जा रहा है कि जब से सपा छोड़कर विमलकृष्ण अग्रवाल भाजपा में आए हैं, यह पहला मौका है जब योगी ने उन्हें इतनी तवज्जो दी है। सूत्रों की मानें तो सीएम ने जिले के हालिया घटनाक्रम पर विमलकृष्ण से फीडबैक लिया है।
सोमवार को लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में दातागंज के सिनोद शाक्य और बिसौली के कुशाग्र सागर ने भाजपा छोड़कर साइकिल थाम ली थी। सिनोद शाक्य 2007 और 2012 में बसपा से विधायक रहे, फिर सपा होते हुए 2022 में भाजपा में आए थे। वहीं कुशाग्र सागर 2017 में बिसौली से भाजपा के विधायक बने थे। इनके साथ म्याऊं के केसी शाक्य और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रीति सागर भी सपा में शामिल हुए।
इस टूट को गंभीरता से लेते हुए सीएम योगी ने मंगलवार को ही बदायूं के तीनों भाजपा विधायकों बिल्सी के हरीश शाक्य, बदायूं के महेशचंद्र गुप्ता, दातागंज से राजीव कुमार बब्बू भैया को भी लखनऊ तलब कर लिया।
इसी बीच विमल कृष्ण की एंट्री ने सियासी बाजार को गर्म कर दिया है। सोशल मीडिया पर दो तरह की चर्चा तेज है। पहली – योगी ने जिले में बिखराव रोकने के लिए विमल जी को कोई बड़ी जिम्मेदारी दी है और किसी सीट से चुनाव लड़ने का ग्रीन सिग्नल दिया है। दूसरी – विमल जी अपनी पुरानी जगह यानी सपा में वापसी का मन बना रहे हैं और यह मुलाकात उसी का नतीजा है।
हालांकि इस पर पूर्व मंत्री विमल कृष्ण अग्रवाल ने विराम लगाते हुए कहा – यह औपचारिक मुलाकात थी। मैं कहीं नहीं जा रहा। मैं भाजपा का सिपाही हूं और रहूंगा।
बहरहाल, पूर्व मंत्री का यूं अचानक सीएम से मिलना और जिले में नेताओं का लगातार पाला बदलना, आने वाले चुनाव के लिए बड़े संकेत दे रहा है। देखना होगा कि योगी-विमल की यह मुलाकात भाजपा के बिखरते कुनबे को समेटती है या फिर कोई नया सियासी गुल खिलाती है।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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