4:02 pm Thursday , 29 October 2026
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कहीं ठहाके, कहीं ओज की हुंकार, कवियों ने बांधा समां

बदायूँ, संवाददाता। श्री रामलीला महोत्सव में बुधवार को राष्ट्रीय गीतकार डॉ. उर्मिलेश को समर्पित रामलीला मंच पर अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस साहित्यिक आयोजन में देश के सुप्रसिद्ध कवियों ने हास्य, व्यंग्य, श्रृंगार और वीर रस से ओतप्रोत रचनाएं पेश कीं। कवियों की प्रभावशाली प्रस्तुतियों से रामलीला मंच तालियों और ठहाकों से गूंजता रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि भाजपा ज़िलाध्यक्ष श्री राजीव गुप्ता, कविगणों एवं आयोजन समिति के पदाधिकारियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। समिति द्वारा अतिथि एवं कवियों का सम्मान किया गया, इसके बाद आमंत्रित कवियों ने अपनी-अपनी काव्य प्रस्तुति के माध्यम से साहित्य, संस्कृति, सामाजिक चेतना, राष्ट्रप्रेम और मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्त किया। हास्य की कविताओं ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया, व्यंग्य रचनाओं ने सामाजिक विसंगतियों पर तीखा प्रहार किया, श्रृंगार रस की कविताओं ने वातावरण में कोमल भावनाएं घोल दीं, जबकि वीर रस की ओजस्वी प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह में उत्साह और राष्ट्रभावना का संचार किया।
प्रख्यात गीतकार ने श्रोताओं की मांग पर अपने अनेक गीत पड़े कहा,
तपती हुयी जमीं है जलधार
बांटता हूँ,
पतझर के रास्तों पर मैं बहार बांटता हूँ,
ये आग का दरिया है जीना भी बहुत मुश्किल,
नफरत के दौर में भी मै प्यार बांटता हूँ
कानपुर के हास्य कवि हेमंत पाण्डेय ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाते हुए कहा,
फूल तुझे देने के लिए निकले थे जानेमन
पर यूपी पुलिस ने उसे रास्ते में ले लिया
लखनऊ की कवियत्री शशि श्रेया ने अपनी मखमली आवाज में कहा,
तोल ले मोतियों से कोई सुंदरी
तुम मेरे ही रहोगे ये वादा करो

लखनऊ के ओज कवि अभय निर्भीक ने कहा,
अपनी धरती पर षड़यंत्री दाल नहीं गलने देंगे,
भारत को हम ढाका या नेपाल नहीं बनने देंगे

डॉ सोनरूपा विशाल ने कहा,
जो मिला ही नहीं वो खोता क्या,
कोई बंजर जमीं पे बोता क्या,
प्यार है तो है ये जहाँ कायम
प्यार होता नहीं तो होता क्या

संचालन कर रहे कोटा के प्रख्यात हास्य कवि आदित्य जैन ने कहा,
ये वक्त जागरण का है आराम का नहीं
जिस दिल में भी सम्मान तेरे नाम का नहीं
उन लोगों के इस देश में रहने से लाभ क्या,
जो राम का नहीं वो किसी काम का नहीं

डॉ. अक्षत अशेष ने कहा,

प्यार का अमन का उनवान तलाशा जाए,
अब तो हर मोड़ पे इंसान तलाशा जाए

कवि सम्मेलन में देर रात तक
कवि सम्मेलन के माध्यम से हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा और काव्य की विविध विधाओं को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। इस सम्मेलन में देश के सुप्रसिद्ध कवियों ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया, जबकि वीर रस की ओजस्वी प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह में उत्साह और राष्ट्रभावना का संचार किया।
कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक मंत्री एवं सह सचिव अमर वैश्य ने कहा कि श्री रामलीला महोत्सव कमेटी धार्मिक आयोजन के साथ-साथ साहित्य, कला और संस्कृति को भी बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। कमेटी अध्यक्ष अरविंद कांत ने कहा कि महोत्सव समिति का उद्देश्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ साहित्यिक गतिविधियों को भी व्यापक मंच प्रदान करना है। प्रति वर्ष ये आयोजन अब स्थायी रूप से किया जायेगा, इस अवसर पर उपाध्यक्ष मुनीश अग्रवाल, मंत्री रविंद्र कुमार (रवि), सदस्य शैलेन्द्र प्रकाश गुप्ता, सांस्कृतिक मंत्री एवं सह सचिव अमर वैश्य, अनुपम वैश्य, गौरव गुप्ता, नितिन गुप्ता, अनूप रस्तोगी, रविन्द्र मोहन सक्सेना, विशाल रस्तोगी, नरेश शंखधार, सुमित मिश्रा, प्रतीश गुप्ता आदि उपस्थित रहे।

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