8:37 am Thursday , 22 October 2026
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सही व्यवहार की पहचान- Jaya Kishori

Jaya
Jaya Kishori

सही व्यवहार की पहचान

एक गाँव में हरिनारायण नाम के किसान रहते थे वे ईमानदार, अनुभवी और व्यवहारकुशल व्यक्ति थे गाँव के लोग अक्सर उनसे सलाह लेने आते थे

उनका बेटा नितिन पढ़ा-लिखा और समझदार था। वह अपने पिता के साथ खेती का काम सँभालता था। नितिन को गलत काम बिल्कुल पसंद नहीं था, लेकिन किसी की गलती देखकर वह तुरंत अपनी बात कह देता था

एक दिन गाँव के कुछ किसान मिलकर खेतों तक पानी पहुँचाने वाली नाली की सफाई कर रहे थे

काम के दौरान एक किसान, गोपाल, ने मिट्टी निकालकर नाली के किनारे रख दी। कुछ मिट्टी वापस नाली में गिरने लगी, जिससे पानी का रास्ता रुक सकता था

यह देखकर नितिन ने सबके सामने ऊँची आवाज में कहा, “गोपाल काका, इतने वर्षों से खेती कर रहे हैं, फिर भी आपको इतना नहीं पता कि मिट्टी कहाँ रखनी चाहिए

गोपाल को यह बात बुरी लगी। उन्होंने कुछ नहीं कहा और चुपचाप काम करते रहे

शाम को हरिनारायण ने नितिन से पूछा, बेटा, आज तुमने गोपाल से जिस प्रकार बात की, क्या वह उचित था

नितिन बोला, “पिताजी, मैंने गलत क्या कहा? मिट्टी नाली में गिर रही थी। मैंने तो सही बात बताई थी

पिता ने कहा, तुम्हारी चिंता सही थी, लेकिन बात कहने का तरीका ठीक नहीं था

नितिन ने पूछा, तो क्या मुझे चुप रहना चाहिए था

हरिनारायण बोले, नहीं बेटा, जहाँ नुकसान होने की संभावना हो, वहाँ समय पर बोलना आवश्यक है। लेकिन किसी की गलती सुधारने के लिए उसका अपमान करना आवश्यक नहीं

अगली सुबह पिता नितिन को खेत पर ले गए।

वहाँ एक मजदूर पानी की मोटर चालू करने की तैयारी कर रहा था। नितिन ने देखा कि पाइप का जोड़ ढीला था

वह तुरंत बोला, भैया, पहले पाइप का जोड़ ठीक कर लीजिए, नहीं तो पानी व्यर्थ बहेगा और काम भी बढ़ जाएगा

मजदूर ने जोड़ ठीक किया और धन्यवाद दिया

हरिनारायण मुस्कुराए और बोले, बेटा, आज भी तुमने गलती बताई, लेकिन सामने वाले को बुरा नहीं लगा जानते हो क्यों

नितिन ने कहा, “क्योंकि आज मैंने शांतिपूर्वक बात की

पिता बोले, “यही व्यवहार की समझ है। जीवन में बोलते समय चार बातों का ध्यान रखना चाहिए

पहली बात — सत्य का ध्यान रखो

जो देखा या समझा है, उसे बिना बढ़ा-चढ़ाकर कहो। किसी एक गलती के आधार पर व्यक्ति को अयोग्य या लापरवाह मत ठहराओ

दूसरी बात — भाषा मधुर रखो

बात स्पष्ट हो, लेकिन शब्दों में अपमान न हो। विनम्रता से कही गई बात को स्वीकार करना अधिक आसान होता है।

तीसरी बात — उचित समय पहचानो

यदि किसी कार्य से तुरंत नुकसान हो सकता है, तो उसी समय सावधान करो। लेकिन व्यक्तिगत कमी या संवेदनशील विषय पर समझाने के लिए एकांत और शांत समय चुनो

चौथी बात — उद्देश्य हितकारी रखो।

बोलने का उद्देश्य अपनी श्रेष्ठता दिखाना नहीं, बल्कि समस्या का समाधान करना होना चाहिए। जहाँ संभव हो, केवल गलती बताने के बजाय उसे सुधारने में सहयोग भी करो

नितिन ने पूछा, पिताजी, यदि कोई व्यक्ति विनम्रता से समझाने पर भी अपनी गलती न सुधारे तो

हरिनारायण ने उत्तर दिया, “तब परिस्थिति के अनुसार दृढ़ता से बात करनी चाहिए। मधुर वाणी का अर्थ कमजोरी नहीं है। आवश्यक होने पर गलत कार्य रोकना भी हमारा कर्तव्य है, लेकिन क्रोध और अपमान से बचना चाहिए

नितिन को अपने पिता की बात समझ में आ गई।

उसी शाम वह गोपाल काका के घर पहुँचा और बोला, काका, कल नाली की मिट्टी को लेकर मैंने आपसे ठीक ढंग से बात नहीं की। मुझे क्षमा कीजिए

गोपाल ने कहा, “बेटा, तुम्हारी बात सही थी। मुझे भी मिट्टी दूसरी जगह रखनी चाहिए थी। लेकिन तुम्हारे शब्दों से मुझे दुःख हुआ था

नितिन ने उत्तर दिया, “आगे से मैं इस बात का ध्यान रखूँगा

अगले दिन दोनों ने मिलकर नाली के किनारे की मिट्टी हटाई और पानी का रास्ता ठीक कर दिया

काम पूरा होने पर गोपाल ने कहा, “देखो बेटा, कल जिस बात से मन में दूरी आ गई थी, आज उसी काम ने हमें फिर साथ ला दिया

नितिन मुस्कुराया। अब वह समझ चुका था कि सही व्यवहार से न केवल काम सुधरता है, बल्कि आपसी विश्वास भी बना रहता है

कहानी का संदेश

परिवार, कार्यस्थल और समाज में मतभेद तथा गलतियाँ होना स्वाभाविक है। ऐसे समय में हमारा व्यवहार ही संबंधों की दिशा तय करता है

किसी की गलती देखकर चुप रहना हमेशा उचित नहीं, लेकिन उसे अपमानित करना भी समाधान नहीं है

बात सत्य हो
भाषा मधुर हो
समय उचित हो
उद्देश्य हितकारी हो

याद रखें — अच्छी वाणी वह नहीं जो केवल सुनने में मीठी लगे, बल्कि वह है जो सत्य को स्पष्ट करे, व्यक्ति का सम्मान बनाए रखे और समस्या के समाधान में सहायक बने

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