पितृपक्ष का काउंटडाउन शुरू: 26 सितंबर से खुलेगा पितृलोक का द्वार।
15 दिन तक होंगे तर्पण-श्राद्ध, नोट कर लें पूरा कैलेंडर।
उझानी (बदायूं) 24 सितंबर।
पितरों को मोक्ष दिलाने वाले पितृपक्ष का काउंटडाउन शुरू हो गया है। इस बार पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा। इन 15 दिनों में पितृलोक का द्वार खुला रहता है, जिसमें पितरों के निमित्त किया गया तर्पण, पिंडदान और दान सीधे पितरों तक पहुंचता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार पितृपक्ष की शुरुआत शनिवार को भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध से होगी और समापन भी शनिवार को सर्व पितृ अमावस्या पर होगा, जो एक दुर्लभ संयोग है।
26 सितंबर, शनिवार – पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर, रविवार – प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर, सोमवार – द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर, मंगलवार – तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर, बुधवार – चतुर्थी व पंचमी श्राद्ध (एक साथ)
01 अक्टूबर, गुरुवार – षष्ठी श्राद्ध
02 अक्टूबर, शुक्रवार – सप्तमी श्राद्ध
03 अक्टूबर, शनिवार – अष्टमी श्राद्ध
04 अक्टूबर, रविवार -नवमी श्राद्ध (सौभाग्यवती माताओं का विशेष श्राद्ध)
05 अक्टूबर, सोमवार – दशमी श्राद्ध
06 अक्टूबर, मंगलवार – एकादशी श्राद्ध
07 अक्टूबर, बुधवार – द्वादशी श्राद्ध
08 अक्टूबर, गुरुवार – त्रयोदशी श्राद्ध
09 अक्टूबर, शुक्रवार – चतुर्दशी श्राद्ध (शस्त्र, अकाल मृत्यु वालों का)
10 अक्टूबर, शनिवार – अमावस्या, सर्व पितृ अमावस्या महाश्राद्ध (जिनकी तिथि याद न हो)
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श्राद्ध के नियम, भूलकर भी न करें ये गलती –
मृत्यु के प्रथम वर्ष में श्राद्ध नहीं किया जाता।
शुक्ल पक्ष, रात के समय और अपने जन्मदिन पर श्राद्ध वर्जित है।
चतुर्दशी तिथि पर सामान्य पितरों का श्राद्ध नहीं होता।
पिता के जीवित रहते गया जाकर श्राद्ध नहीं करना चाहिए।
श्राद्ध में बैंगन, मसूर, अरहर, प्याज, लहसुन, हींग और लोहे के बर्तन में बना भोजन निषेध है।
सही समय और सही तरीका -श्राद्ध के लिए दोपहर का समय सर्वोत्तम है। कुतुप काल सुबह 11:36 से 12:24 बजे तक और अपराह्न काल दोपहर 1:12 से 3:36 बजे तक श्राद्ध के लिए उत्तम माना गया है। पितृ पूजन में जनेऊ दाहिने कंधे पर (अपसव्य) रखें, चंदन तर्जनी उंगली से लगाएं और मिट्टी या लकड़ी के बर्तन में तुलसी जल के साथ भोग लगाएं।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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