शहनाई की जगह उठीं चार अर्थियां: एक हादसे ने उजाड़ दिया हंसता-खेलता परिवार।
उझानी-बदांयू 18 जून।
जिस आंगन में 29 जून को शहनाई बजनी थी, वहां गुरुवार को एक साथ चार अर्थियां उठीं। ट्रैक्टरों की बेकाबू रेस ने डालचंद्र के हंसते-खेलते परिवार को पलभर में उजाड़ दिया। घर की दहलीज से एक साथ मां, बहन, पत्नी और बहू के जनाजे निकले तो पूरा गांव बिलख पड़ा। गांव की गलियों में सन्नाटा पसर गया और किसी के घर चूल्हा नहीं जला।
दूल्हे कुंवरपाल के बड़े भाई वीरपाल की आंखें पथरा गई हैं। रुंधे गले से बोले, “इस हादसे ने मेरी मां राजकुमारी, बहन सरला, पत्नी गंगाश्री और भाई की पत्नी को छीन लिया। पिता डालचंद्र अस्पताल में हैं। उनके दाहिने पैर में फ्रैक्चर है, सिर फटा है। अब इस घर में बचा ही क्या है?”



आंगन में पड़े शादी के कार्ड, सूटकेस में रखे नए कपड़े और दीवार पर टंगी शेरवानी अब काटने को दौड़ते हैं। वीरपाल बताते हैं, “टेंट वाला, हलवाई, फोटोग्राफर सब बुक था। कल तक घर में गीत बज रहे थे। आज सिर्फ सिसकियां हैं।”
राजकुमारी, गंगाश्री, सरला और प्रेमावती का शव बुधवार रातभर घर में ही रखा रहा। दूर-दराज से रिश्तेदारों के पहुंचने का इंतजार था। गुरुवार सुबह जब एक साथ चार अर्थियां उठीं तो कलेजा चीर देने वाला मंजर था। कछला गंगाघाट पर अंतिम संस्कार के वक्त हर आंख नम थी।
हादसे में घायल डालचंद्र को बुधवार रात मेडिकल कॉलेज से छुट्टी मिल गई। लेकिन घर पहुंचते ही चार मौतों की खबर ने उन्हें तोड़ दिया। डॉक्टरों के मुताबिक उनके पैर और सिर में गंभीर चोट है।
हालात बिगड़ने की आशंका में उझानी, अलापुर और कादरचौक थानों का पुलिस बल रातभर गांव में तैनात रहा। सौ से ज्यादा जवान गश्त करते रहे। अधिकारी मौके पर डटे रहे।
वीरपाल ने रोते हुए कहा, “खेतों में बिना अनुमति रेस कराई गई। ट्रैक्टर वालों ने हमारे परिवार को खत्म कर दिया। जब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं होते, हमें चैन नहीं मिलेगा।”
पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। ट्रैक्टर चालक फरार हैं। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को मदद का भरोसा दिया है, लेकिन सवाल यही है कि क्या कोई मुआवजा वीरपाल से उसकी मां, बहन और पत्नी को लौटा पाएगा?
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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