कदमों में तूफान, दर्द पर भारी आस्था – समय से पहले शिवालय पहुंचने को दौड़ रहे डाक कांवड़िए।
उझानी-बदांयू 11 अगस्त।
बरेली मथुरा हाईवे पर डाक कांवड़ियों की रफ्तार तेज हो गई है। कछला गंगा घाट से गंगाजल लेकर लौट रहे शिवभक्त पैरों में छाले और शरीर की थकान के बावजूद समय से पहले शिवालय पहुंचने के लिए लगातार दौड़ रहे हैं।
डाक कांवड़ में समय की खास भूमिका होती है। शिवभक्तों के सामने निर्धारित समय में शिवालय पहुंचकर जलाभिषेक करने का लक्ष्य रहता है। इसी वजह से थकान उन्हें ज्यादा देर रोक नहीं पाती।
दौड़ते हुए किसी साथी की रफ्तार धीमी पड़ती है तो दूसरे साथी उसे आवाज देकर साथ लेते हैं। हर किसी की नजर घड़ी और मंजिल दोनों पर है। हर कदम के साथ समय कम होता जाता है और शिवालय की दूरी भी घटती जाती है।
डाक कांवड़ियों के लिए यह सफर महज दूरी तय करने का नहीं, बल्कि संकल्प पूरा करने का है। लंबी दूरी तय करने के बाद पैरों में छाले पड़ जाते हैं और तलवों में तेज दर्द होने लगता है। शरीर आराम मांगता है, लेकिन कुछ देर रुककर दर्द सहलाने और पट्टी बांधने के बाद वही कदम फिर हाईवे पर दौड़ने लगते हैं।
एक पल के लिए पैर ठिठकते हैं। तलवों का दर्द चेहरे पर साफ दिखाई देता है। तभी साथी पानी की बोतल बढ़ाता है, कोई पैरों पर पट्टी बांधता है और फिर जत्था आगे बढ़ जाता है। न थकान उन्हें रोक पा रही है और न ही पैरों के छाले।
दौड़ते शिवभक्तों के साथ उनके साथी भी कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। पीलीभीत निवासी मोहित ने बताया कि दल में कोई पानी पिलाता है, कोई फल देता है तो कोई थके हुए पैरों की मालिश करता है।
दल के साथ चल रहे वाहनों में पानी, भोजन और प्राथमिक उपचार का सामान रखा गया है। हाईवे किनारे लगे सेवा शिविर भी कांवड़ियों के लिए राहत का सहारा बने हुए हैं। कुछ देर आराम करने के बाद शिवभक्त फिर अपनी मंजिल की ओर निकल पड़ते हैं।
बरेली – मथुरा हाईवे पर इन दिनों डाक कांवड़ियों की यही तस्वीर दिखाई दे रही है। कछला से गंगाजल लेकर लौट रहे शिवभक्तों की आंखों के सामने सिर्फ एक मंजिल है — शिवालय पहुंचना और भोलेनाथ का जलाभिषेक करना।आस्था के इस तूफान में दर्द पीछे छूट गया है और संकल्प सबसे आगे है।
राजेश वार्ष्णेय एमके
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