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दुर्लभ संयोगों ने बनाया महाशिवरात्रि को विशेष – आचार्य राजेश कुमार शर्मा

दुर्लभ संयोगों ने बनाया महाशिवरात्रि को विशेष: आचार्य राजेश कुमार शर्मा

महाशिवरात्रि इस बार बहुत ही विशेष मानी जा रही है। आचार्य राजेश कुमार शर्मा बताते हैं इस वर्ष इस दिन शिव योग,आयुष्मान योग, सौभाग्य योग,सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग, साध्य योग, शुक्ल योग, ध्रुव योग, व्यतिपात, शोभन योग और वरियान योग का प्रभाव रहेगा। इसी के साथ बुध और शुक्र लक्ष्मी नारायण राजयोग बना रहे हैं। बुध और सूर्य बुधादित्य राजयोग बना रहे हैं। सूर्य और शुक्र के मेल से शुक्रादित्य योग बन रहा है। कुंभ राशि में शनि शश महापुरुष राजयोग बना रहे हैं। इसके अलावा, कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र, शनि और राहु पंचग्रह राजयोग बना रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इन 5 विशेष योगों का एक साथ बनना बहुत ही दुर्लभ संयोग है।

महाशिवरात्रि पर भद्रा
आचार्य राजेश कुमार शर्मा कहते हैं महाशिवरात्रि पर 15 फरवरी को भद्रा सायं 5:04 मिनट पर शुरू होगी, इसका समापन 16 फरवरी को प्रातः 5:32 पर होगा। करीब 12 घंटे तक भद्रा काल रहेगा। हालांकि भद्रा पाताल लोक की है। जब भद्रा पाताल में रहती है तब इसका प्रभाव पृथ्वी पर नहीं पड़ता है। ऐसे में भक्तगण बिना किसी के अवरोध के भगवान शिव की पूजा कर पाएंगे।

महाशिवरात्रि के मुहूर्त

सुबह के मुहूर्त

चर – प्रातः 8: 24से9:48
लाभ – प्रातः 9:48 से11:11
अमृत – प्रातः 11:11से दोपहर 12:35

सायं का मुहूर्त

शुभ – 6:11से रात्रि 7:47
अमृत – रात्रि 7:47से 9:23
चर – रात्रि 9:23 से 10:59
शिव साधना के दिन दुर्लभ संयोग

शिव पूजा विधि

दिनभर शिव का ध्यान करते हुए मौन रहें। सायंकाल के समय फिर शिव मंदिर में जाकर पूर्व या उत्तर मुखी होकर बैठें और पूजन करें.
शिवलिंग का गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद, शक्करसे अभिषेक करें।
भगवान् महाकाल को धतूरे और मदार के फूल, बेलपत्र, चंदन, अक्षत आदि समर्पित करते हुए उनका ध्यान करें और मन ही मन 108 बार ‘ओम् नम: शिवाय’ का जाप करें।
पूरे दिन निर्जल रहकर व्रत करें तो विशेष पुण्य होता है।

महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

महाशिवरात्रि के चार प्रहर की पूजा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष पुरुषार्थों की सिद्धि होती है. जितनी भी नकारात्मकता या फिर व्याधियां हैं, वे सभी रात्रि के दौरान सक्रिय होती हैं। ये सभी भगवान शिव के वशीभूत रहती हैं, इसलिए उन सभी का नाश करने के लिए विशेष रूप से महाशिवरात्रि पर शिव साधना की जाती है।

आचार्य राजेश कुमार शर्मा

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