7:41 am Saturday , 15 August 2026
BREAKING NEWS

1 जनवरी को गुरु डॉ ब्रजेन्द्र अवस्थी जी के जन्मदिन पर उनको समर्पित स्मृतिपूर्ण कविता

कविता -बदायूं के वीर रस के कवि डॉ ब्रजेन्द्र अवस्थी

बदायूं की आन वान शान थे वो
मां भारती के अद्भुत लाल थे वो
मां इन्दुमती पिता हजारी लाल के पुत्र ,
डॉ ब्रजेन्द्र भारती के भाल थे वो।।
बजृ के समान थे वो ब्रज से महान थे,
बात के धनी ऐसे नाम ब्रजेन्द्र था।
1 जनवरी को जन्में, अलीगंज में जन्म हुआ
शिक्षा लखीमपुर में, नाम लल्लन हुआ।।
मनोरमा पत्नी बनी जन्मे तीन लाल
पुत्री तृप्ति पूर्ति पा हुये वो निहाल।
योग्यता के दम पर नियुक्ति हल्द्वानी फिर बदायूं हुई
निवास बनाया बदायूं में , कवि लेखनीअविरल बही।।
वंशीधर शुक्ल की छाया पा लेखनी हुई निहाल,
कवि सम्मेलन से भूमि मिली ,बही बनी फिर ढाल।।
बजृ के समान वो तो थे ही , ब्रज से थे वो महान,
बात के धनी तो थे ही साथ में थे अच्छे इंसान।।
जीवन की सुरसरि में सदा काव्य की गंगा बहाते थे,
देश में ही नहीं विदेश मे भी हिन्दी का डंका बजाते थे।।
दहाड़ते थे मंच पर जब तो धरती हिल जाती थी,
वीरता की कविता से धरती भी थर्रा जाती थी।।
अटल जी के साथ जब मंच पर काव्यगंगा बहायी थी,
तब ही वीररस कवि व आशुकवि की पदवी पायी थी।।
“सिंहगढ़ विजय”,’सुधन्वा’, ‘मेघदूत’, ‘परशुराम’,’भूमिजा’
‘यशोदा ‘ जैसे खंडकाव्य लेखनी से लिखे
‘तापसी ‘प्रबंध काव्य तो ‘छत्रपति शिवाजी’ महाकाव्य
‘मनोरमा’ गीत संग्रह तो ‘जवानों जिंदाबाद’ युद्धकाव्य थे।।
कर्मयोग, एकता ,कूप कथा लम्बी कविता रचाई थी ,
ऐसे रचयिता की काव्यगरिमा सबके मन भायी थी।
अमरीका, कनाडा, इंग्लैंड में भी काव्य सरिता बहायी थी।
22 जनवरी 2006 को भारती पुत्र सदा को सो गये, साहित्य रचयिता अवस्थी जी काल कवलित हो गये।।
@डॉ शुभ्रा माहेश्वरी

विज्ञापन एक्सप्रेस