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बदांयू में गहराया डीएपी संकट खेत तैयार पर खाद गायब, किसानों की नींद उड़ी

उझानी बदांयू 27 अक्टूबर।

जिले में एक बार फिर खाद का संकट सामने आया है। रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र में डीएपी खाद का संकट गहराने लगा है। किसानों का कहना है कि आलू खेती के लिए यह समय बेहद अनुकूल है। मिट्टी तैयार है, नमी बिल्कुल सही है, पर खाद के अभाव में बुवाई रुक गई है। जिससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है।उझानी सहित जिले के अन्य इलाकों में भी उचित मात्रा में खाद नहीं मिल पा रही है।

उझानी क्षेत्र के गांव अब्दुल्ला गंज, बरामालदेव,गंगोरा,नरऊ, अढौली,छतुईया, हज़रत गंज,तिगोडा समेत दर्जनों गांवों में किसान आलू, गेहूं और सरसों की बुआई के लिए खेत तैयार कर चुके हैं, मगर सहकारी समितियों पर इफको डीएपी खाद नदारद है। स्थानीय किसानों का कहना है कि इफको किसान सेवा केंद्र और सहकारी समितियों को पिछले सप्ताह से इफको का नया स्टॉक नहीं मिला। कई जगह गोदामों में पुराने स्टॉक की बोरी खत्म हो चुकी है।

बाजार में महंगे दाम पर खाद खरीदने की बनी मजबूरी
किसानों ने बताया कि वह पिछले कई दिनों से साधन सहकारी समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। सुबह से लाइन में लगने के बावजूद जब खाद नहीं मिलती, तो उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है। इस बीच निजी दुकानदारों ने डीएपी के दाम 1350 से बढ़ाकर 1500 प्रति बोरी से अधिक कर दिए हैं। मजबूर होकर खाद खरीदने की आवश्यकता है।

यह खेल हर साल होता है। जब तक पुलिस या अधिकारी नहीं पहुंचते, खाद गायब रहती है। जैसे ही उच्चाधिकारियों से शिकायत होती है, ट्रक पहुंच जाता है। गंगा राम किसान उझानी।

दूसरी कंपनियों की खाद उतनी कारगर नहीं होती। इफको डीएपी ही भरोसे की है। तीन दिन से समिति के चक्कर काट रहा हूं, कहा जाता है कि कल आएगी। अब बाजार से महंगी खरीदनी पड़ रही है।
शेलेन्द्र कुमार, किसान फूलपुर।

आलू के साथ गेहूं की बुआई भी प्रभावित हो रही है। सरकार कहती है पर्याप्त स्टॉक है, पर यहां तो एक बोरी तक नहीं दिख रही है।
सत्यवीर सिंह किसान बमनोसी।

अगर अगले पांच दिनों में खाद नहीं आई तो आलू और सरसों की बुआई पर असर पड़ेगा। समय निकल गया तो पूरी फसल चौपट हो जाएंगी। महावीर सिंह किसान नरऊ।

किसानों ने जिलाधिकारी और कृषि विभाग से गुहार लगाई है कि खाद वितरण की पारदर्शी व्यवस्था की जाए। साथ ही यह भी मांग की है कि समितियों पर पुलिस बल तैनात कर खाद वितरण की निगरानी की जाए, ताकि कोई कालाबाजारी न हो सके।

राजेश वार्ष्णेय एमके

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