Ravina Mishra जब होगी बरसात, बूंदों के रोमांच पर बैठकर आना तुम, शरद की धूप में, और जाड़ों की दोपहर में, ग्रीष्म के भी भोर में आना तुम, प्रतिक्षा के एहसास में, याद की रग रग में, खामोशी के संगीत में, तुम हीं पहुंचना मुझ तक।