4:59 am Saturday , 15 August 2026
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क्या तुम बिल्कुल वैसे निकले जैसा सबने सोचा था ?

कछला की बात – सुशील धींगडा के साथ
बात पिछलंे विधानसभा अथवा लोकसभा चुनाव की की जाए तो एक बात पूरी तरह साफ नजर आई थी कि भाजपा की प्रदेश और केंद्र की सत्ता होने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार पूरी तरह खाली हाथ थे। बदायूं के भाजपाई जिले में शिक्षा, बिजली और व्यवसाय के क्षेत्र में कुछ नहीं करा पाए थे। बदायूं को लम्बी दूरी की ट्रेन दिलाने का वादा हवाई बना हुआ था, दिल्ली और लखनउ से बदायूं को रेललाइन का सपना लगभग टूट चुका था। मेडीकल कालिज अपने इलाज को तरस रहा था। स्वास्थ्य विभाग के साथ जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल लूटखसोट के चलते चर्चा में बने थे जबकि स्वास्थ्य विभाग में अपने चहेतों का मलाइदार कुर्सी दिलवाने को भाजपाईयों के बीच खुलेआम महाभारत होती दिख रही थी। बदायूं की सांसद डा संघमित्रा मौर्य वजीरगंज की सरकारी भूमि के मामले को उठाकर अपनों से जंग के हालात बना चुकी थी। बदायूं लोकसभा सीट पर भाजपा ने उम्मीदवार बदला और आवला में सांसद को दोबारा मैदान में उतारा दोनों सीटो पर भाजपा नहीं भाजपा के पालनहार और भीतरघात करने वालों ने हार का दंश झेलने को मजबूर कर दिया और स्थानीय भाजपाई भले ही ना माने लेकिन एक कटुसत्य है कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवारों को जो वोट मिले उनमें आधे से ज्यादा वोट मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की इमानदारी एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता के थे।
आज वह समय आ गया है जब भाजपा के पालनहारों को सोचना चाहिए कि मतदाताओं की उम्मीदों पर कितना खरे उतरे हैं लेकिन इस पर मंथन करने का समय किसी के पास नहीं है क्योंकि आपस की जंग में एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए ना जाने कितने मतलबी अपना रंग दिखा रहे हैं और भाजपा के लिए दिनरात एक करने वाले, चुनाव में मुकदमों का शिकार होने वाले आज अपने नेताओं द्वारा दूरी बनाने के कारण अपने घरों में बैठ गए है। बाहर वाले खाएगें मलाई और अपनों की करेगें जगहसाई तो दल कोई हो चुनाव में उसको हर तरफ दलदल ही दिखाई देगी।

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