4:57 am Saturday , 15 August 2026
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सास बहु

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☘️ सास बहु ☘️
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करूणा जी बाजार से सब्जी खरीद कर घर जा रही थीं- कि रास्ते में उनकी मुलाकात उनकी जेठानी की बहु- “शारदा” से हो गई।
शारदा: नमस्ते मांजी आप सब्जी लेकर जा रही हैं…! संजना कहीं गई हुई है..क्या…?
करूणा: नमस्ते बहु कैसी हो..?
संजना घर पर ही है, वो उसने क्लाउड किचन का काम शुरू किया है। इसलिये मैं उसकी हैल्प कर रही हूँ।
शारदा: माफ करना मांजी, लेकिन अभी कुनाल जी की शादी को छः महीने ही हुए हैं- और आपने अपनी बहु को सिर पर चढ़ा लिया है।
वह सारा काम आपसे करवाती है।
करूणा: नहीं बहु! ऐसी बात नहीं है। हम दोंनो मिल बांट कर काम कर लेते हैं।
जब उसके पास ऑडर नहीं होते- तो वह मुझे काम नहीं करने देती।
लेकिन जब ऑडर आ जाते हैं- तो कुछ काम मुझसे करवा लेती है।
शारदा: अब मैं क्या बोलूं मांजी जैसी आपकी मर्जी…! अच्छा अब मैं चलती हूंँ!
घर आकर करूणा जी देखती हैं- कि संजना किसी से फोन पर बात कर रही थी।
वह बात खत्म करके करूणा जी के पास आई।
संजना: मम्मी जी आप आ गईं! काफी थक गई होंगी।
बताईये क्या लेंगी। कुछ ठंडा ले आउं या चाय बना दूं।
माफ करना मम्मी जी! मैं आपसे काम नहीं करवाना चाहती,लेकिन कभी कभी इतने ऑडर आ जाते हैं, कि अकेले संभालना मुश्किल हो जाता है।
करूणा: मैं सब समझती हूँ, वैसे भी सब्जी खरीदना,मार्केट जाना घर का सामान लाना, ये सब काम तो मैं बहुत सालों से कर रही हूँ!
इसमें परेशानी कैसी- तू बस अपने काम पर फोकस कर,जा एक कप चाय बना ला।
दूसरी ओर,शारदा अपने घर पहुंचती है- और अपनी सास रश्मी जी को सारी बात बताती है।
रश्मि जी: मैं तो पहले ही जानती थी,मैंने तो शादी में ही कह दिया था, कि बहु के लक्षण सही नहीं हैं।
देखा नहीं था- स्टेज पर कैसे अपने दूल्हे से हंस हंस कर बात कर रही थी। मेरी देवरानी सीधी है,तो उसे नौकरानी बना कर रख दिया है।
खैर हमें क्या वो जाने अपने घर की, लेकिन तू ये मत समझियो,कि मैं तुझे भी इतनी छूट दे दूंगी।
शारदा: नहीं मांजी मैं तो बस आपको इसलिये बता रही थी, कि मुझे चाची जी को देख कर तरस आ रहा था।
एक दिन करूणा जी खाना खाने के बाद आराम कर रही थीं।
शाम के समय डोर बेल बजी- संजना ने गेट खोला तो सामने अविनाश जी खड़े थे- वे अन्दर आकर बैठे।

तभी करूणा जी बाहर आईं और बोली:
करूणा जी: आज आप बहुत जल्दी आ गये।
संजना! जा अपने ससुर जी के लिये चाय बना ला बेटा!
अविनाश जी: रहने दो- चाय नहीं चाहिये।
आज भाई साहब से मिलने गया था। उनकी तबियत थोड़ी खराब थी। राकेश ने बताया था।
करूणा जी: क्या हो गया जेठ जी को- मुझे भी ले चलते साथ में।
अविनाश जी: नहीं ऐसा कुछ खास नहीं था,बस थोड़ासा- बी पी बढ़ गया था।
राकेश नहीं आया अभी तक।
करूणा जी: राकेश आज देर से आयेगा।
अविनाश जी फ्रेश होकर अपने कमरे में बैठे थे।
अविनाश जी: करूणा आज भाभी कह रही थीं, कि तुमने अपने बहु को सिर पर चढ़ा लिया है,घर का सारा काम करूणा से करवाती है।
करूणा जी कुछ बोल पाती,इससे पहले ही संजना कमरे में आ गई।
उसने सब सुन लिया था। उसने खाने की थाली रखते हुए कहा।
संजना: पापा जी मुझे माफ कर दीजिये! आज से मैं मम्मी जी से कुछ नहीं करवाउंगी। चाहें मुझे अपना काम बंद करना पड़े।
करूणा जी: चुप रह बहु! मैंने तुझसे कोई शिकायत की है क्या..? बोलने दे- जिसे जो बोलना है,मैं अपनी बहु का हर काम में साथ दूंगी। तू काम बंद नहीं करेगी, नहीं तो मैं गुस्सा हो जाउंगी।
संजना (बहु) की आंखों से आंसू बह रहे थे।
अविनाश जी: बेटी मैं तो बस ये बता रहा था, कि भाभी क्या कह रहीं थीं।
तुम चिन्ता मत करो- हमें तुम्हारे काम से कोई परेशानी नहीं है।
संजना: लेकिन मम्मी जी आपको बहुत परेशानी होती है। सारा दिन कुछ न कुछ काम लगा रहता है।
करूण जी: बहु मैंने तुझे हमेशा अपनी बेटी माना है।
तेरे लिये मैं कुछ भी कर सकती हूं! हमारा रिश्ता “सास बहु” का नहीं “मां बेटी” का है। चिन्ता मत कर- जिसे जो बोलना है बोलने दे।
इसी तरह समय बीत रहा था- एक दिन करूणा जी सुबह उठ कर ड्राइंग रूम में आईं तो देखा- संजना किचन में नहीं है।
करूणा जी उसके बेडरूम के पास पहुंची और आवाज दी।
करूणा जी: राकेश, संजना को जगा दे। आज के ऑडर के लिये क्या सामान लाना है। उसकी लिस्ट बना दे।
राकेश: मम्मी वो संजना को तेज बुखार है।
करूणा जी ने अन्दर जाकर देखा संजना को तेज बुखार था।

संजना: मम्मी जी मैं बस अभी गोली खाकर आती हूं किचन में देखूंगी क्या सामान है क्या नहीं।

करूणा जी: नहीं तू बस आराम कर मैं अभी तूझे दवाई देती हूं। आज तू कुछ नहीं करेगी।

संजना: नहीं मम्मी जी अगर ऑडर टाईम पर पूरे नहीं हुए- तो रेटिंग गिर जायेगी। मैं बस थोड़ी देर में आती हूं।
करूणा जी: नहीं ला अपना फोन दे, मैं देखती हूं। क्या भेजना है।
संजना के मना करने पर भी- करूणा जी नहीं मानी- और उसका फोन लेकर ऑडर चेक करने लगीं।
फिर वो फटा फट किचन में गईं- और सारे ऑडर एक के बाद एक पूरे करने लगीं।
शाम तक सारा काम निबट गया। रात को करूणा जी संजना के कमरे में गईं।
करूणा जी: बहु तुझे तो अभी भी तेज बुखार है।
राकेश एक काम कर- तू अपने पापा के पास सो जा- मैं आज संजना के पास रुकुंगी।
संजना: मम्मी जी मैं ठीक हूं। आप अपने कमरे में सो जाईये यहां आपको नींद नहीं आयेगी।
करूणा जी: चुप रह बस तू आराम कर,बाकी सब मुझ पर छोड़ दे।
करूणा जी रात भर संजना की देखभाल करती रहीं- सुबह तक संजना बिल्कुल ठीक हो गई थी।
करूणा जी सो रही थीं- कि संजना आकर उनके पास बैठ गई।

वह मोबाईल देख रही थी- उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे।

करूणा जी: अरे ! पता ही नही चला कब नींद आ गई- तू रो क्यों रही है! तू ठीक तो है।

संजना: मम्मी जी मैं बिल्कुल ठीक हूं। कल आपने बारह ऑडर भेज दिये- वो भी अकेले।

करूणा जी: क्या हुआ- कहीं कुछ गलत तो नहीं चला गया। किसी ने कम्पलेंट तो नहीं की न…? बता ना रो क्यों रही है….?

संजना: मम्मी जी आपका बना खाना कस्टमर को बहुत पसंद आया,सबने अच्छी रेटिंग दी है। मुझे गोल्डन मेंम्बर बना दिया है।
आप दिन भर खाना बनाती रहीं- और रात भर मेरी देखभाल करती रहीं।
करूणा: हे भगवान तूने तो डरा दिया। पागल मैंने कहा था ना, कि तू मेरी बहु नहीं मेरी बेटी है। क्या एक मां अपनी बेटी के लिये इतना भी नहीं कर सकती।

और संजना अपनी सास से लिपट गई।

गूगल से साभार

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