4:10 am Wednesday , 12 August 2026
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युवाओं पर नशे का कहर, समाज की जड़ें हो रहीं खोखली: प्रदीप प्रजापति

जहां देश तरक्की की राह पर तेजी से कदम बढ़ा रहा है, वहीं समाज का युवा नशे के दलदल में गहराई तक धँसता जा रहा है। 14 से 25 वर्ष की आयु के युवा – जो कल के भविष्य हैं – आज नशे के सबसे बड़े शिकार बनते जा रहे हैं।

गांव हो या शहर, हर गली, हर चौराहे पर शराब, गांजा आदि मादक पदार्थ आसानी से मिल जाते हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह लत अब स्कूल और कॉलेज की उम्र में लग रही है।
माता-पिता, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासन सभी चिंतित हैं, लेकिन समाधान अभी दूर है मनोचिकित्सकों और समाजशास्त्रियों का कहना है कि यह केवल स्वास्थ्य नहीं, बल्कि नैतिक, सामाजिक और पारिवारिक संकट का कारण बन चुका है।

जरूरत है न केवल कानून की, बल्कि जागरूकता, संवाद और संस्कारों की — ताकि युवा दिशा भटके नहीं, देश की दिशा बनाएं।

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