Gunjan Agrawal चांद को रोष था कि वह जला है , अपनी चांदनी के विरह में.. लेकिन उसे खबर ही नहीं कि चांदनी भी, प्रतिपल झूझी है उस विरह वेदना की अग्नि से..!!!! गुंजन शिशिर