9:21 pm Tuesday , 11 August 2026
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श्री रघुनाथ जी ( पंजाबी ) मंदिर का वार्षिकोत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया

*श्री रघुनाथ जी ( पंजाबी ) मंदिर का वार्षिकोत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया गया**

बदायूं शहर के प्रसिद्ध श्री रघुनाथ जी मंदिर के वार्षिकोत्सव का आयोजन इस वर्ष भी बड़ी धूमधाम और भक्ति के साथ किया गया। सभा के मीडिया प्रभारी हेमंत कुमार दुआ ने बताया कि यह उत्सव 10 दिनों तक चला और इसमें हजारों भक्तों ने भाग लेकर देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त किया।


*मुख्य आकर्षण*

इस अवसर पर 18 मई से श्री राम चरित मानस जी के पाठों को महिला भक्तगणों ने पढ़ा , जिसका समापन 27 मई को किया गया।

*प्रवचन*

24 एवं 25 मई को श्री सत जींदा कल्याणा आश्रम से पधारे महंत श्री खुशहाल दास जी महाराज ने भक्तगणों को प्रवचन देकर उन्हें सत मार्ग पर चलना बताया तथा इस अवसर पर संगीतमय श्री सुंदरकांड जी का पाठ भी किया गया।


– **धार्मिक अनुष्ठान:** मंदिर में विशेष पूजा, के साथ तीन दिवसीय श्री विष्णु महायज्ञ का आयोजन किया गया साथ ही भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें श्री प्रेमानंद जी महाराज जी के शिष्य अमन मिश्री जी ने सभी को भाव विभोर कर दिया।

– *पुरस्कार वितरण*
– इस अवसर पर श्री राम जन्मोत्सव के अवसर पर निकलने वाली शोभा यात्रा में सहयोग प्रदान करने वाली संस्थाओं एवं व्यक्तियों को पुरस्कृत भी किया गया, इसके साथ ही श्री राम चरित मानस जी का पाठ करने वाली महिला भक्तगणों को भी पुरस्कृत किया गया।

– **लंगर एवं प्रसाद वितरण:** इस अवसर पर तीन दिवस रात्रि में भंडारे की व्यवस्था रही एवं 27 मई को एक विशाल अटूट भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें बदायूं शहर के हजारों भक्तगणों ने बिना किसी भेदभाव के पंगत में साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया।

*विशेष सहयोग* –

– वार्षिकोत्सव के सभी कार्यक्रमों में श्री सत जींदा कल्याणा कमेटी, विश्व हिंदू परिषद महिला संकीर्तन मंडल, श्री बाल दुर्गा मंडल, श्री सुंदरकांड कमेटी का विशेष सहयोग रहा।

**श्री सनातन धर्म सभा की और से:**

श्री सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र कुमार चड्ढा जी ने कहा कि यह उत्सव हर साल भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है ताकि सनातन संस्कृति और धार्मिक मूल्यों को बढ़ावा मिले। उन्होंने सभी भक्तों और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।

इस वार्षिकोत्सव ने न केवल आस्था का संचार किया, बल्कि सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूती प्रदान की।

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