1:43 am Thursday , 13 August 2026
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एक्सप्रेस परिक्रमा

उड़ता है आकाश में- Ravina Mishra

Ravina Mishra एक शब्द पाखी दुख के आवर्त में घिर! उड़ता है आकाश में तलाशने, अपने हीं रुदन का श्रोत, कुछ देर तक, कुछ दूर तक, फिर, लौट आता है वहीं,,,, जहाँ से भरी उसने उड़ान खाली हाथ रीते मन रुदन,,,,, जो कभी स्तवन बना उसकी आत्मा का उड़ते हुए,,,, …

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इंसानियत टैक्स फ्री- Pushpa

Pushpa इंसानियत टैक्स फ्री होती है अगर कहीं दिखाने का मौका मिले तो मौका मत छोड़िए! जीना सरल है, प्यार करना सरल है, बस सरल होना ही बहुत कठिन है

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