Vandana भले वो सावन न रहेगा पर यारा मेरा मेरे साथ रहेगा ना रहेगी दिलों में कोई #उदासी ना रहेंगी ये अंखियां प्यासी #ये_दूरियां_क्यों बढ़ी दिलों के बीच निगाहें तुझमें अब भी खोती जाती #उदास है दिल और #उदास यह धड़कन आ जाओ दिल में मेरे तड़प रहा मेरा मन
Read More »पहली याद – VeenaShri
VeenaShri सुबह_सुबह सूरज का साथ हो गुनगुनाते परिंदों की आवाज हो,, हांथ में चाये का कप और यादों में कोई खाश हो, दुआ है ये हमारी की उस खूबसरत सुबह की पहली याद आप हो❤️
Read More »हसरतों की महफिल – मानसी
मानसी!!💐🙏 ” बेशक , सुलग जाती हैं हसरतों की महफिल खूब , अंदाज ये बयां पे जब सादगी से वार होता हैं खूब !!
Read More »तमस धरा का- सुनीता पाण्डेय
सुनीता पाण्डेय ‘सुरभि’🪈🦚🪷🪄🕉️ तमस धरा का मिट गया, है प्रकाश चहुँ ओर। मन में जागी आस है, होगी मंगल भोर।। यदि हम मन में ठान लें, करेंगे कमियांँ दूर। कोई भी तब लालसा, नहीं करे मजबूर।। दीन-दुखी के सामने, नहीं रहो मगरूर। गुण देवत्व के हैं यही, गुन लो इसे …
Read More »आख़िरी पन्ने पर – Mahi
Mahi आख़िरी पन्ने पर लिखूं भी तो क्या जब तुम इस कहानी में आख़िर तक साथ ही नहीं थे”,,🥀🦋
Read More »प्रेम की परीक्षा – Neelam Pandey
Neelam Pandey #जयश्रीराधेकृष्ण कभी-कभी दूरी भी जरूरी होती है… ताकि प्रेम और गहरा हो सके… राधा और कृष्ण अलग हैं… पर उनका रिश्ता कभी अलग नहीं होता… क्योंकि जो दिल से जुड़ा हो… उसे कोई दूरी तोड़ नहीं सकती… ये दूरी नहीं… ये प्रेम की परीक्षा है… 🙏
Read More »निर्णयात्मक- PRIYA SHARMA
PRIYA SHARMA यह जीवन में समझना कि कुछ भी स्थायी नहीं है, हमें अधिक सहनशील, अधिक क्षमाशील और कम निर्णयात्मक बनाता है। कभी हार मत मानो, सकारात्मक रहो, मेहनत करो, और इसे संभव बनाओ। सुप्रभात दोस्तो! आपका दिन खुशहाल, शांतिपूर्ण, संतोषजनक और मुस्कुराहट से भरा हो 😊 शुभ सोमवार जय …
Read More »छलावे की तैयारी- Gunjan Agrawal
Gunjan Agrawal प्रेम में “छलावे” की तैयारी हमेशा… “समर्पण” की दहलीज से शुरू होती है..!!! गुंजन शिशिर
Read More »दिखावे की मोहब्बत – Madhuri
Madhuri दिखावे की मोहब्बत क्यों कर रहे हो बेफिजूल ही मुझ पर क्यों मर रहे हो कहते हो कि फिक्र है मेरी सच बताओ मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हो
Read More »आंसुओं में धुली खुशी- Ravina Mishra
Ravina Mishra आंसुओं में धुली खुशी की तरह रिश्ते होते हैं शायरी की तरह जब कभी बादलों में घिरता है चांद लगता है आदमी की तरह किसी रोज न किसी दरीचे से सामने आओ रोशनी की तरह सब नजर का फरेब है वर्ना कोई होता नहीं किसी की तरह।
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