VeenaShri
*ढाल में ढले समय की,*
*शस्त्र में ढले सदा!!*
*सूर्य थे मगर वो सरल,*
*दीप से जले सदा!!*
*ताप में तपे स्वयं ही,*
*स्वर्ण से गले सदा!!*
*राम ऐसा पथ है,*
*जिसपे राम ही चले सदा…!!!*
*दशरथ नंदन, अयोध्या नरेश,*
*रघुकुल दीपक मर्यादा पुरुषोत्तम*
*श्री रामचंद्र जी के प्राकटय उत्सव की*
*आपको हार्दिक शुभकामनाएं*
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