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उझानी के इफको केंद्र पर डीएपी के लिए भटक रहे किसान, एक माह से ‘नो स्टॉक’ का बोर्ड

उझानी के इफको केंद्र पर डीएपी के लिए भटक रहे किसान, एक माह से ‘नो स्टॉक’ का बोर्ड।

‘डीएपी नहीं है, एनपी ले जाओ’ 1350 की खाद के बदले 2450 की खाद थमाने का आरोप, भाकियू (हल) ने दिया 7 दिन का अल्टीमेटम।

उझानी (बदायूं) 6 नवंबर ।

बुवाई का सीजन सिर पर है और किसान खाद के लिए दर-दर भटक रहा है। उझानी स्थित इफको किसान सेवा केंद्र पर पिछले एक माह से डीएपी पूरी तरह गायब है। किसान सुबह से शाम तक केंद्र के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें एक ही जवाब मिल रहा है – डीएपी नहीं है।

आरोप है कि डीएपी की कमी की आड़ में किसानों को जबरन महंगी खाद थमाई जा रही है। डीएपी 1350 रुपये में मिलती है, जबकि उसके बदले एनपीके वगैरह 2450 रुपये में लेने पर मजबूर किया जा रहा है। यानी किसान की जेब पर सीधे 1100 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

आज भारतीय किसान यूनियन (हल) के राष्ट्रीय महासचिव अनिल ठाकुर किसानों के साथ इफको किसान सेवा केंद्र उझानी पहुंचे। केंद्र पर पहले से ही कई किसान खाद के लिए खड़े थे। अनिल ठाकुर ने केंद्र के संबंधित सचिव से दो टूक कहा – सरकार किसानों के लिए खाद, डीएपी, बीज, दवाइयां भेजती है, फिर किसानों को क्यों नहीं मिल रही?

उन्होंने साफ चेतावनी दी “अगले 7 दिनों के अंदर अगर किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी का सही वितरण नहीं हुआ, तो भारतीय किसान यूनियन (हल) उग्र आंदोलन करेगी।”

केंद्र पर मौजूद किसानों ने भी अपनी व्यथा सुनाई। किसी ने कहा – तीन बार आ चुका हूं, हर बार डीएपी खत्म बताई जाती है। किसी ने कहा – मजबूरी में महंगी खाद लेनी पड़ रही है, वरना खेत खाली रह जाएगा।

किसानों का कहना है कि गेहूं, सरसों, आलू की बुवाई के लिए डीएपी सबसे जरूरी है। समय पर डीएपी न मिली तो बुवाई लेट होगी और फसल का सीधा नुकसान होगा।

भाकियू (हल) के राष्ट्रीय महासचिव अनिल ठाकुर ने प्रशासन से मांग की है कि केंद्र पर अब तक कितनी डीएपी आई, कितनी बंटी और किसे बंटी – इसका पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए। ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। कमी असली है या जानबूझकर बनाई गई है, यह भी सामने आना चाहिए।

“डीएपी मिलती ही नहीं, महंगी खाद लेने को कहा जाता है। हम कहां जाएं?”


अब सबकी नजर अगले 7 दिन पर टिकी है। अगर डीएपी की आपूर्ति नहीं सुधरी तो मामला सड़क पर उतर सकता है। किसान यूनियन ने साफ कर दिया है कि इस बार किसान चुप नहीं बैठेगा।

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