Gunjan Agrawal
वो शब्द जो कभी कविता के सांचे में न ढल सके!
वो अथाह दर्द थे,
जो होंठों तक आकर भी न निकल सके
कुछ ख़्वाब थे,
जिन्हें हक़ीक़त का नाम न दे सके
कुछ अपने थे,
जिन्हें कभी पराया न कह सके
और यूँ ही उम्र गुज़र गई ख़ुद को बयां करते हुए,
हम वो कवि रहे, जो अपना ही मन लिख न सके.!!
गुंजन शिशिर
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