1:38 am Thursday , 5 November 2026
BREAKING NEWS

हम स्वयं लिखते हैं अपना भाग्य, ईश्वर नहीं – आचार्य संजीव रूप

गुधनी गांव में हुआ आर्य समाज का सत्संग
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी में स्थित प्रज्ञा मंदिर में रविवार को आर्य समाज की ओर से साप्ताहिक सत्संग का आयोजन श्रद्धा एवं वैदिक परंपराओं के अनुरूप किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संसार के कल्याण एवं मानव मात्र के उपकार के लिए ईश्वर से प्रार्थना के साथ हुई। इसके उपरांत अथर्ववेद के मंत्रोच्चार के साथ विधिवत यज्ञ संपन्न कराया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आहुतियां दीं। सत्संग में वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने कहा कि मनुष्य पशु-पक्षियों से इस कारण भिन्न है क्योंकि वह सोचने-समझने की क्षमता रखता है। मनुष्य ही सही और गलत में भेद कर सकता है और वही अपनी नियति तथा भाग्य को बदलने की सामर्थ्य रखता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारा भाग्य ईश्वर नहीं लिखता, बल्कि हम स्वयं अपने कर्मों से उसे गढ़ते हैं। जब मनुष्य समाज में फैले अज्ञान और पाखंड को दूर करने का प्रयास करता है, तब उसके लिए संत और विद्वान बनने के द्वार खुलते हैं। अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने से बलवान बनने का मार्ग प्रशस्त होता है, जबकि दान और जरूरतमंदों की सहायता करने से अभाव दूर होते हैं और समृद्धि के द्वार खुलते हैं। यज्ञ का संचालन करते हुए पं. प्रश्रय आर्य ने कहा कि स्वयं के सुधार से ही समाज का सुधार संभव है। केवल वाणी से नहीं, बल्कि आचरण से ही स्थायी प्रभाव पड़ता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से वैदिक जीवन मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। डॉ. सत्यम आर्य, तृप्ति शास्त्री एवं कौशिकी रानी ने भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भजनों के माध्यम से वैदिक संस्कारों और मानव कल्याण का संदेश दिया गया। इस मौके पर राकेश आर्य, संतोष कुमारी, भावना रानी, मोना रानी, कमलेश कुमारी, मुन्नी देवी, सूरजवती देवी सहित आर्य संस्कार शाला के बच्चे एवं अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद का वितरण किया गया।

विज्ञापन एक्सप्रेस
No posts found.