बिसौली। श्री श्री 1008 विदेहनदिनी शरण जी महाराज सोई आश्रम की असीम कृपा से चल रहे सात दिवसीय श्री मारुति नंदन महायज्ञ एवं श्रीराम कथा का षष्ठम दिवस पूर्ण रूप से भक्तिरस में सराबोर रहा। प्रारंभ में वैदिक आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच यज्ञकुंड में आहुतियाँ अर्पित की गईं। सुगंधित धूप, दीप, नैवेद्य और पुष्पों से सजे यज्ञमंडप में श्रद्धा, पवित्रता और भक्ति का दिव्य वातावरण व्याप्त रहा।
कथा व्यास पूज्य पं. राधेश्याम जी महाराज (सतना, मध्यप्रदेश) ने अपने मधुर वचनों से सीता स्वयंवर एवं परशुराम-लक्ष्मण संवाद की अद्भुत कथा का वर्णन किया। कथा श्रवण करते समय उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और “जय श्रीराम” के गगनभेदी नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। पं. महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि जब मनुष्य अपने भीतर के अहंकार का परित्याग कर भक्ति का मार्ग अपनाता है, तभी उसे सच्ची शांति और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने भक्तों से जीवन में प्रेम, सेवा और सच्चे सदाचार का मार्ग अपनाने का आह्वान किया। कथा के दौरान भक्तगणों ने दीपक जलाकर प्रभु श्रीराम की आरती उतारी, जिससे वातावरण और भी अधिक आध्यात्मिक हो उठा। हर ओर भक्ति, प्रेम और आनंद का अद्भुत संगम दिखाई दिया। इस पावन अवसर पर आचार्य राजेश शास्त्री, राम बिहारी शास्त्री, पल्लू महाराज, शिवम शास्त्री, बृजेश शास्त्री, प्रमोद यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।











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