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कागजों का दाम बढ़ने से और महंगी हो जाएंगी कॉपी-किताबें

केन्द्र सरकार ने कांपी किताबों से हटाया जीएसटी,मगर कागज़ पर बढाया।

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उझानी बदांयू 13 सितंबर।

जीएसटी काउंसिल से कई सामानों के दाम में गिरावट आएगी। लेकिन कागजों का दाम बढ़ने से अभिभावकों की अब और परेशानी बढ़ेगी। इससे उन्हें पहले से अधिक कॉपी के दाम चुकाने पड़ेंगे। जबकि किताबों पर जीएसटी नहीं लगाई गई है।

एनसीईआरटी किताबों की दर कम होने के बाद भी प्राइवेट स्कूल संचालक मनमाना तरीके से अन्य प्रकाशन कि किताबें बच्चों को पढ़ने के लिए मजबूर करते हैं। जबकि उन किताबों का मूल्य सैकड़ों में होता है। जो छात्र-छात्राओं के साथ अभिभावकों के लिए बोझ बन जाता है। ऐसे में किताबों पर जीएसटी शून्य होने के बाद भी कागजों के बढ़े दर से इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा, जिससे अभिभावक अभी से परेशान हैं।

अभिभावकों का कहना है कि अभी तक कक्षा एक कि किताब लेने के लिए 1500 से दो हजार तक का खर्च आता है। जबकि कक्षा बढ़ने के साथ यह पैसा और भी बढ़ता चला जाता है। अभिभावकों ने बताया कि काउंसिल ने कॉपी, प्रैक्टिकल, एक्सरसाइज बुक, टेस्ट बुक, ग्राफ बुक और नोट बुक में जीएसटी शून्य कर दी है। वहीं कागज पर जीएसटी की दर 12 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दी है, जबकि कागज से ही यह उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इसके मायने यह है हुआ कि छह प्रतिशत टैक्स और बढ़ गया है, जिससे निजी प्रकाशन के लोगों को किताबों की दरों में और भी बढ़ोतरी हो जाएगी।

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