Kaveri Gupta अल्फाज़ो की जादुगरी से, वाक़िफ़ नही हूँ! ना ही इल्म है मुझे, पेश ए अदायगी का !! फक़त इक लफ्ज़, जो सीने मे धंसा है मेरे ! जिसे इश्क़ कहती है दूनियाँ सारी, वही रिश्ता है मुझे आपकी हर रहनुमाई का !!