GuptaManjari जैसे फूलों से है ये परिमल जैसे परिंदों से है ये आसमां। जैसे संबंधों से है रिश्ता जैसे विविधता से ये दुनियां। जैसे उम्मीदों से है हम जिंदा वैसे लफ्ज़ों से है ये जिन्दगी।