Ravina Mishra
बार बार भी हार न जो तुम बैठोगे
बार बार भी जीत न जो तुम ऐंठोगे
जहाँ अमर मानव के भाग्य सिहाते हैं
वहाँ किसी दिन पैठोगे तुम पैठोगे
गूॅंजे युग युग ये विश्वास तराने हैं
लक्ष्य सपन सब जिनके खॅंडहर होते हैं
उनके चलते रहने के कुछ माने हैं।
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