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सुबह हो या शाम… उझानी में हर ओर लगता है जाम

सुबह हो या शाम… उझानी में हर ओर लगता है जाम।

उझानी-बदांयू 20 अप्रैल।

जाम के झाम में फंसा शहर कराह रहा है, लेकिन कोई भी देखने, सुनने व समस्या का समाधान कराने के लिए गंभीर नहीं है। सुबह हो या शाम नगर का कोई न कोई इलाका जाम से जूझता रहता है। खासकर घंटाघर मुख्य चौराहों व कछला रोड पर लोगों को भीषण गर्मी में भी तेज धूप में तपना पड़ता है।

जाम का मुख्य कारण शहर की तंग सड़कों पर चार पहिया वाहनों का निकलना, दुकानों के आगे दो पहिया वाहनों का खड़ा होना और चौराहों पर खाने पीने के साथ फलों के ठेले लगे होना है।

साप्ताहिक बंदी बुधवार को भी शहर में हर तरफ जाम ही जाम नजर आ रहा था।

रेलवे फाटक सिथ्ति पंखा रोड का रोज लगने वाला जाम तो आम हो गया है। यहां लोगों को घंटों जाम से जूझना पड़ता है। इसके अलावा आज कश्यप पुलिया से हलवाई चौक तक वाहन चालक घंटों जाम में फंसे रहे। खास बात यह है कि इस पुलिया पर ही खाने पीने के ठेले लगे रहते हैं। इसकी जानकारी होने के बाद भी पालिका प्रशासन आंखें मूंदकर बैठा हुआ है।

यह हाल केवल एक रास्ते या चौराहे का नहीं बल्कि शहर के अधिकांश हिस्से का है। बाजार में ई-रिक्शा तो पहले ही संकट बने हुए हैं। इस पर चार पहिया वाहनों का प्रवेश तो पैदल भी नहीं निकलने देता। घंटाघर चौराहे पर पुलिस कर्मियों के रहने के बाद भी लोग जाम से जूझते रहे। बाजार की बात की जाए तो कछला रोड के सर्राफा और पसरट्टा, कपड़ा व बर्तनों के बाजार से लोगों का पैदल निकलना भी दूभर रहता है।

यहां कम चौड़ी सड़क होने के बाद भी दुकानदार अपना सामान सड़क पर लगा लेते हैं, रही सही कसर दुकानों के आगे दो पहिया वाहन खड़े करके पूरी कर देते हैं। ऐसे में ग्राहक भी इन बाजारों में दो पहिया वाहन लेकर जाने से कतराते हैं। स्टेशन रोड पर भी मुख्य डाकघर व बैंक होने से भी कमोबेश यही स्थिति रहती है। इस रोड से बसों संग भारी वाहनों का आवागमन भी रहता है।

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अतिक्रमण अभियान बंद होना भी जाम की बड़ी वजह

पिछले वर्ष जब अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चला तो शहर की अधिकांश सड़कों पर आवागमन सुलभ हो गया था। सड़कें काफी चौड़ी नजर आने लगी थीं, लेकिन अभियान बंद होने के चंद दिनों बाद ही अतिक्रमणकारी पांव पसारने लगे। अब हालत यह है कि पहले से भी ज्यादा स्थिति खराब हो गई है। दुकानों में कम और सड़कों पर सामान ज्यादा नजर आता है। स्टेशन रोड पर तो दोनों और हालात और खराब हैं। रेडिमेड कपड़ा बेचने वालों के फड़ सुबह से ही सड़क के दोनों ओर लग जाते हैं। खास बात यह है कि नगर पालिका कार्यालय के सामने और मुख्य द्वार पर ही चाट-पकौड़ी, चाऊमीन, बर्गर, टिक्की , गोलगप्पे के तमाम ठेले नजर आ रहे हैं, लेकिन यह भी जिम्मेदारों को नजर नहीं आ रहे।
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राजेश वार्ष्णेय एमके।

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