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महंगाई की नई चाल: पैकेट हल्के, जेब पर भारी, कंपनियों ने कीमत नहीं बढ़ाई, मात्रा कम कर दी

महंगाई की नई चाल: पैकेट हल्के, जेब पर भारी,
कंपनियों ने कीमत नहीं बढ़ाई, मात्रा कम कर दी।

उझानी-बदांयू 18 जुलाई।

महंगाई से बचने के लिए कंपनियों ने अब नया तरीका अपना लिया है। दाम नहीं बढ़ाए, सीधे पैकेट का वजन ही घटा दिया। इसकी चपेट में अब साबुन और सर्फ जैसे रोजमर्रा के उत्पाद भी आ गए हैं।

बाजार में पहले 200 ग्राम में मिलने वाले नहाने और कपड़े धोने के साबुन अब 150 से 175 ग्राम के पैक में मिल रहे हैं। डिटर्जेंट पाउडर के छोटे पैक का वजन भी 10 से 25 फीसदी तक कम कर दिया गया है।

व्यापारियों के अनुसार पिछले कुछ समय से पैकेजिंग, खाद्य तेल, औद्योगिक तेल और विभिन्न रसायनों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। उत्पादन लागत बढ़ने के कारण कंपनियों ने सीधे दाम बढ़ाने के बजाय पैकिंग का आकार छोटा कर दिया। इससे ग्राहक को पहली नजर में कीमत समान लगती है, लेकिन हकीकत में प्रति ग्राम उत्पाद पहले से महंगा पड़ रहा है।

कछला रोड के जनरल स्टोर संचालक संजय कुमार कहते हैं, ग्राहक जब पुराना और नया पैकेट साथ रखकर देखते हैं तो फर्क तुरंत समझ आ जाता है। कई लोग शिकायत भी कर रहे हैं।

किराना व्यापारी अनिल कुमार बताते हैं, साबुन-डिटर्जेंट की बिक्री पहले जैसी ही है, लेकिन अब लोग पैकेट पर लिखा वजन जरूर पढ़ रहे हैं। कंपनियां लागत बढ़ने का हवाला दे रही हैं।

उत्पाद पहले अब
नहाने-कपड़े का साबुन 200 ग्राम 150-175 ग्राम
डिटर्जेंट छोटा पैक पूरा वजन 10-25% तक कम
कीमत लगभग समान प्रति ग्राम महंगा।

पहले रसोई का बजट तेल, दाल, मसाले और गैस ने बिगाड़ा। अब बाथरूम और कपड़े धोने का खर्च भी बढ़ गया है। जानकार इसे “श्रिंकफ्लेशन” कहते हैं – यानी दाम वही, पर मिलता कम।

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