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उझानी ‘तहरीर मंडी’: अफसर मौन, दलालों को खुली छूट।

उझानी ‘तहरीर मंडी’: अफसर मौन, दलालों को खुली छूट।

बदांयू 14 मई।

आज की बात सुशील धींगडा के साथ –

उझानी CHC गेट पर इंसाफ बिक रहा है, पर वर्दी वालों की कलम खामोश है। ‘तहरीर मंडी’ चलाने वाले दलाल बेखौफ हैं क्योंकि थाने से लेकर SSP दफ्तर तक सबकी आंखें बंद हैं।

कोतवाली प्रभारी: फोन बंद, दरवाजा बंद।

फरियादी इंसाफ मांगते हुए कोतवाली पहुंचते हैं, पर प्रभारी का CUG नंबर नहीं उठता। थाने में पूछो तो जवाब मिलता है, “साहब मीटिंग में हैं।” पर गेट पर वसूली की मीटिंग कभी बंद नहीं हुई। ड्यूटी मुंशी खुलेआम कहता है, “लिखित में लाओगे तभी बात होगी।” यानी दलाल से लिखवाकर लाओ।

खबर वायरल होने के बाद भी SSP कार्यालय में सन्नाटा है। एक सिपाही ने नाम न छापने की शर्त पर पोल खोल दी: “ऊपर से इशारा नहीं मिला। सबका हिस्सा बंधा है। कार्रवाई करेंगे तो किसके पेट पर लात मारेंगे?”

BNS धारा 173 कहती है पुलिस खुद बयान दर्ज करे। आपके थाने का मुंशी फरियादी को दलाल के पास क्यों भेज रहा है? आपको पता नहीं या जानकारी के बाद भी चुप हैं?
144 घंटे में एक जांच, एक सस्पेंशन, एक छापा तक नहीं। ये लापरवाही है या ‘शह’?
गरीब से 200 रुपये की वसूली हो रही है। इसकी जिम्मेदारी ड्यूटी मुंशी की है या कुर्सी पर बैठे अफसर की?

थाने का मुंशी दलाल से मिला है, हल्का का दरोगा आंख मूंदे है, और प्रभारी ‘मीटिंग’ में व्यस्त हैं। ऊपर SSP दफ्तर फाइल दबाए बैठा है। नतीजा: CHC गेट पर 1 रुपये का कागज 200 में बिक रहा है और इंसाफ खरीदना पड़ रहा है।

जब रखवाले ही खामोश हों तो दलालों का राज चलेगा ही। उझानी में अभी यही हो रहा है।

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