गुधनी (बदायूँ)। यज्ञ तीर्थ गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में रविवार को साप्ताहिक सत्संग एवं यज्ञ का आयोजन किया गया। पं. प्रश्रय आर्य जय ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ संपन्न कराया। सत्संग में गृहस्थ जीवन के महत्व, पारिवारिक संस्कारों और आदर्श परिवार निर्माण के विषय पर विचार रखे गए। इस अवसर पर वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने अपने प्रवचन में कहा कि गृहस्थ जीवन केवल भोग-विलास का साधन नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, सेवा, सहयोग और जिम्मेदारियों का पवित्र आश्रम है। परिवार में पति-पत्नी एक-दूसरे के पूरक बनकर रहें। दोनों एक-दूसरे के सम्मान, स्वास्थ्य, प्रसन्नता और आत्मसम्मान का ध्यान रखें। जिस घर में परस्पर विश्वास, मधुर व्यवहार और संस्कार होते हैं, वही घर सुखी परिवार बनता है।
पं. प्रश्रय आर्य जय ने कहा कि गृहस्थ जीवन में धन कमाने के साथ-साथ धर्म, चरित्र और संस्कारों का अर्जन भी आवश्यक है। माता-पिता का सम्मान, बच्चों को अच्छे संस्कार, बुजुर्गों की सेवा और समाज के प्रति कर्तव्यबोध आदर्श गृहस्थ के प्रमुख लक्षण हैं। परिवार में संवाद और सहयोग बना रहे तो अनेक समस्याओं का समाधान सहज हो सकता है।
सत्संग में वैदिक यज्ञ के आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व पर भी चर्चा हुई। उपस्थित श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां देकर परिवार की सुख-समृद्धि, विश्व कल्याण और सामाजिक सद्भाव की कामना की।
कार्यक्रम में राकेश आर्य, श्रीमती लीलावती देवी, विचित्रपाल सिंह, श्रीमती संतोष कुमारी, कुमारी ईशा आर्य, तानिया रानी, कुमारी तृप्ति आर्य तथा आर्य संस्कारशाला के बच्चे उपस्थित रहे।
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