Ratna Nautiyal
जय श्री राम 🙏 जब मनुष्य ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और सच्चे मन से प्रार्थना करता है, तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। भौतिक या शारीरिक सीमाएँ ईश्वर की कृपा के आगे समाप्त हो जाती हैं।
मूक होइ बाचाल पंगु चढइ गिरिबर गहन।
जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलि मल दहन।।
भावार्थ- जिनकी कृपा से गूँगा बहुत सुंदर बोलने वाला हो जाता है और लँगड़ा-लूला दुर्गम पहाड़ पर चढ़ जाता है, वे कलियुग के सब पापों को जला डालने वाले दयालु (भगवान) मुझ पर द्रवित हों (दया करें)॥
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