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बदायूं: डॉक्टरों पर दबाव, अब गंभीर मरीजों को भर्ती करने से कतरा रहे अस्पताल

बदायूं: डॉक्टरों पर दबाव, अब गंभीर मरीजों को भर्ती करने से कतरा रहे अस्पताल।

रामा अस्पताल में हंगामे के बाद बदला रुख, रात में रेफर की नौबत से बढ़ी चिंता।

बदांयू 30 जुलाई।

कुछ दिन और ऐसे ही चलते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब डॉक्टर गंभीर मरीज का उपचार करने से भी मना कर देंगे।

बदायूं के रामा अस्पताल में कल रात एक मरीज की मौत के बाद हुए हंगामे और चिकित्सकों की हुई किरकिरी ने पूरे जिले के डॉक्टरों को बैकफुट पर धकेल दिया है। मौत के बाद परिजनों के आक्रोश और अस्पताल परिसर में मचे बवाल से सहमे चिकित्सक अब जोखिम लेने से बच रहे हैं।

जिले के कई चिकित्सकों का साफ कहना है कि कोई भी डॉक्टर नहीं चाहता कि उसके हाथों मरीज की जान जाए। जिंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ में है। लेकिन जब हर मौत के बाद लापरवाही का आरोप लगाकर अभद्रता की जाती है, तो फिर कौन जिम्मेदारी ले।

इसी डर के चलते अब एक नई कार्यशैली बनती दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक जिले के कुछ अस्पतालों ने तय किया है कि अब सिर्फ हल्के-फुल्के मरीजों को ही भर्ती किया जाएगा। जो मरीज गंभीर हालत में आएगा उसे तुरंत रेफर करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

यही सवाल अब सबसे बड़ा बन गया है। डॉक्टरों का यह रुख अगर जारी रहा तो रात के समय गंभीर बीमार होने पर जब स्थानीय स्तर पर ही भर्ती से मना कर दिया जाएगा, तो बरेली ले जाते-ले जाते मरीज दम तोड़ देगा। चिकित्सा जगत के लोग इसे जिले के स्वास्थ्य तंत्र के लिए गंभीर खतरा मान रहे हैं।

चिकित्सकों का दर्द भी कम नहीं। उनका कहना है कि एक वर्ग ने यह चलन बना लिया है कि मरीज की मौत होते ही पहले मुआवजे की मांग और फिर डॉक्टर पर लापरवाही का इल्जाम। इसके बाद गाली-गलौज और मारपीट तक नौबत आ जाती है।

चिकित्सक को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है। अगर इसी तरह उनके साथ व्यवहार होगा तो इलाज कौन करेगा एक वरिष्ठ चिकित्सक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा।

फिलहाल रामा अस्पताल की घटना के बाद जिले भर में डॉक्टरों में असुरक्षा का भाव है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मरीज को समय पर इलाज भी मिले और डॉक्टर भी सुरक्षित होकर ड्यूटी कर सकें। वरना आने वाले दिनों में इमरजेंसी का मतलब सिर्फ एक कागज पर रेफर पर्ची बनकर रह जाएगा।

राजेश वार्ष्णेय एमके।

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