सारिका सिंह (मनी ) जाहिल सी लगती है हर शाम तू नहीं तो कुछ नहीं तेरे बिना हर गली है अनजान तेरी आहट गिनना चाहते है अब आये कब आये मेरी जान........ हर रोज गिनता हूँ दिनों की गिनती नहीं मिलता कोई मगर दिल का मेहमान!!