Gunjan Agrawal सुनो.. रख लो न अपने सिरहाने मेरी तमाम बैचैनियां, और चूमकर मेरी पेशानी को तुम.. भर लो मुझे अपने बहुपाश में..!! ताकि तृप्त हो सके रूह, जो अरसे से सिसक रही है..!!! गुंजन शिशिर