11:14 pm Wednesday , 12 August 2026
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आंसुओं में धुली खुशी- Ravina Mishra

Ravina Mishra

आंसुओं में धुली खुशी की तरह
रिश्ते होते हैं शायरी की तरह
जब कभी बादलों में घिरता है
चांद लगता है आदमी की तरह
किसी रोज न किसी दरीचे से
सामने आओ रोशनी की तरह
सब नजर का फरेब है वर्ना
कोई होता नहीं किसी की तरह।

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