Ravina Mishra आंसुओं में धुली खुशी की तरह रिश्ते होते हैं शायरी की तरह जब कभी बादलों में घिरता है चांद लगता है आदमी की तरह किसी रोज न किसी दरीचे से सामने आओ रोशनी की तरह सब नजर का फरेब है वर्ना कोई होता नहीं किसी की तरह।