VeenaShri
पिघले नीलम सा बहता हुआ ये समाँ
नीली नीली सी खामोशियाँ
ना कहीं है ज़मीं ना कहीं आसमाँ
सरसराती हुई टहनियाँ
पत्तियाँ
कह रही हैं कि बस एक तुम हो यहाँ
सिर्फ़ मैं हूँ
मेरी साँसें हैं और मेरी धड़कने
ऐसी गहराइयाँ ऐसी तनहाइयाँ
और मैं
सिर्फ़ मैं
अपने होने पे मुझको यक़ीन आ गया
शुभ रजनी
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