Ravina Mishra
वो तुम्हारी व्यथा को समझें न समझें,
हम तुम्हारी वेदना को जानते हैं।
वो सजाते हैं ले हार हांथों में,
हार तेरी हम मिटाना जानते हैं।
तेरे कदमों में बिछाते वेे हंसी कलियाँ,
हम अंगारों से बचाना जानते हैं।
वो भले रहते तुम्हारे धड़कनों के पास,
हम तो बस दूरी मिटाना चाहते हैं।
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