Kshama स्त्रियां जब रो लेती है .. खुद में सिमट कर फिर वो बाहर अपनापन नहीं ढूंढ़ती ... वो बंद कर देती है हर उस अधूरे पन्ने को जिसमें उसका अस्तित्व बिखरा हुआ सा था...