Gunjan Agrawal जब प्रेमिल रिश्तों की सतह पर , "शंका रूपी काई" जमने लगे.. तब जरूरी है उस रिश्ते में, " प्रेम की सुलगहट" और "संवाद रूपी तपिश" की, जिससे उस शंका रूपी काई को.. समय रहते जमने से रोका जा सके..!!! गुंजन शिशिर