Ravina Mishra
बीमार दिल को सुलाने चली हूँ
यादों की बस्ती बसाने चली हूँ
यहाँ उठ रही हैं हृदय में हिलोरें
वहाँ कर रही होंगी यादें किलोरें
यादों से घायल दिल सुलाने चली हूँ
बीमार दिल को सुलाने चली हूँ।
यहाँ देखती हूँ दुनिया है भोली
सूरत निराली,है कोकिल सी बोली
इसी बोल पर दिल लुटाने चली हूँ।
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