सारिका सिंह अमावस्या की रात है तू रखना सब्र मै फिर आऊंगा ढल जाएंगी धीरे धीरे ये काली घटा मै फिर नजर आऊंगा....... बहुत बेचैन करेंगी दूरी तुझे मगर हर वक़्त मै याद आऊंगा..... फिर आएगी पूर्णिमा फिर चाँद तेरा आकर तुझसे फिर प्यार निभाउंगा.....❣️❣️