सारिका सिंह (मनी )
उठ जाता हूँ रोज तेरे मैखाने से प्यासा..
मगर उस मैखाने की महक का नशा बखूब चढ़ता है
लेकर आते है लोग पैमाने मेरे आम खास मे
मगर पिऊ कैसे तेरा नशा नहीं उतरता है..
आज फिर से दिल ने कहा तू मेरा ही है
उठने को होता हूँ ज़ब तेरी महफ़िल से मुझे तू रोक लेता है ❣️
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