11:29 pm Wednesday , 4 November 2026
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मेंथा फेक्ट्री अग्निकांड – कोतवाली पुलिस को दर्ज करनी पड़ेगी एफआईआर, तभी होगा हड्डियों का डीएनए टेस्ट ?

21 मई की रात हुआ कुंडा नरसिंहपुर की मेंथा फैक्ट्री में भीषण अग्निकांड।

अब तक फैक्ट्री प्रबंधन व प्रशासनिक अमला नकारता रहा मुनेन्द्र का आग से जिंदा जल जाना ?

उझानी बदांयू 7 जून।

दिल्ली हाइवे स्थित भारत मिंट एलायड कंपनी में 21 मई की रात आंधी से वायलर की चिमनी गिरने से भीषण आग लग गई थी, आलम यह था कि फैक्ट्री में होने वाले धमाकों की आवाज से शहर की 50% आबादी अपना घर बंद कर सुरक्षित स्थानों पर चली गई। फायरबिग्रेड की दर्जनों गाड़ियों को आग बुझाने में 40 घंटे से ज्यादा का समय लगा।

फैक्ट्री में आग लगने के अगले ही दिन से मुजरिया थाने के गांव बिचौला टप्पा जामुनी के तीन सगे भाई भी काम कर रहे थे, जिसमें मुनेन्द्र आग लगते वक्त वायलर की चिमनी गिरने से उस में दब गया। दोनों भाइयों ने उसे निकालने का भरसम प्रयास किया मगर कामयाबी ना मिली, आग के विकराल रूप से लगने पर अपने आप को बचाने के चक्कर में भाग लिए।

22 मई से दोनों भाई चीख-चीखकर कह रहे थे कि भाई मुनेंद्र आग में जिंदा जल गया। मगर कोई अधिकारी हो या फैक्ट्री प्रबंधन कमेटी मानने को तैयार ना हुऐ। कहा गया कि सभी कर्मचारी सुरक्षित बाहर निकल आऐ।

परिजनों ने डीएम आफिस जाकर धरना दिया राजनैतिक पार्टियों ने भी धरना प्रदर्शन कर मुनेन्द्र को खोजने की मांग की। तब जाकर चार दिन बाद मलवा हटाने का काम शुरू हुआ।

काफी जद्दोजहद के बाद 5 जून रात परिजनों की मोजूदगी में कोतवाली पुलिस ने फैक्ट्री के मलवे से मानव शरीर के कुछ अवशेष ( हड्डियां ) बरामद कर पास मिले जले मोबाइल व कलाई घड़ी के आधार पर अवशेष परिजनों की सहमति से मुनेंद्र के मानकर फोरेंसिक, डीएनए जांच को सुरक्षित रख लिए, बीते दिवस परिजनों ने बचे अवशेषों का अंतिम संस्कार भी कर दिया।

दोष किसी का नहीं महज हादसा ?

फैक्ट्री में लगी आग से फैक्ट्री स्वामी मनोज गोयल का भी काफी नुक़सान हुआ,अनुमान है कि 100 करोड का नुक़सान हुआ, तेज आंधी आने से चिमनी गिरने से आग लग गई, इसमें फैक्ट्री मालिकों का भी कोई दोष नहीं क्योंकि आग मशीनों की कमी से नहीं बल्कि आंधी आने पर लगी इसे आपदा कह सकते हैं।

बीती रात फैक्ट्री के मलवे से मुनेन्द्र के शरीर के अवशेष मिलने पर कोतवाली पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी पड़ेगी, जबकि 26 मई को ही मुनेन्द्र के परिजन पुलिस को तहरीर सोंप चुके थे। लेकिन कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की बस गुमशुदगी दर्ज की।

कोर्ट के आदेश व परिजनों की सहमति से होगा डीएनए।

एफआईआर दर्ज होने के बाद ही मिले अवशेषों की फोरेंसिक जांच व डीएनए टेस्ट संभव है, कानून के जानकार कहते हैं कि पुलिस को रिपोर्ट दर्ज कर सभी व्योरा दर्ज कर कोर्ट से परमीशन लेनी होगी, उसमें परिजनों की सहमति भी आवश्यक है।

16 दिन तड़पने व फैक्ट्री में 24 घंटे निगरानी करने के बाद ही परिजनों को मुनेन्द्र की कुछ हड्डियां नसीब हुई है उनका बीते दिवस अंतिम संस्कार कर दिया गया। अब एक दो दिन बाद परिवार के सदस्य आकर रिपोर्ट दर्ज कराने को कोतवाली पुलिस से संपर्क कर सकते हैं।

जानकार बताते हैं कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद ही फोरेंसिक टीम द्वारा संरक्षित अवशेषों की जांच हो पाऐगी। कि यह हड्डियां मुनेन्द्र की ही है , प्राइवेट ऐजेन्सियों द्वारा डीएनए जांच में 10 हजार से लेकर 50 हजार तक का खर्च आता है। अब देखना है कि पुलिस किस आधार पर मुकदमा पंजीकृत कर फैक्ट्री के मलवे से मिले अवशेषों की जांच को न्यायालय से परमीशन लेती है।

राजेश वार्ष्णेय एमके।

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