अगर तुम भूल कर भी कभी सच बोल जाते हो ।
अकेले जीने का रास्ता तुम फिर खोल जाते हो।
यहां झूठी फरेबी बात ही अच्छी मधुर लगती ।
तुम्हारे सच की आहट से ये दुनिया भाग जाती है ।
जमाना उस किनारे है जहां बहरों की दुनिया है ।
अगर तुम सच सुनाओगे बेचारे सुन नहीं सकते ।
वहां जाकर भी खुद को तुम अकेला ही तो पाते हो ।
रिश्तो की चाहत में हमेशा मुंह की ही खाते हो ।
अकेले जीने का रास्ता तुम फिर से खोल जाते हो ।
अगर तुम भूल कर भी कभी सच बोल जाते हो।
अकेले जीने का रास्ता तुम फिर से खोल जाते हो ।
प्रियंका विवेक सिंह
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