बरसात- ओम सिंह
नन्ही नन्ही जल की बूंदे,
गिरती है जब आसमान से।
टप टप की ध्वनि होती रहती,
बच्चों को आनंद है देती।
पशु पक्षी मस्ती में घूमे,
कोयल और पपीहा बोले।
पंख खोलकर नाचे मोर,
देखो चरखी करती शोर।
रंग बिरंगी नाव बनाकर,
बच्चे तैराते लिख नाम।
दादाजी ने कहकर घर में,
देखो खूब पकोड़े बनवाया।
चटनी और पकोड़ी खाकर,
सब बच्चों ने धूम मचाया।
मन को छूकर पवन चल रही,
झूम रही है डाली डाली।
नन्ही नन्ही जल की बूंदे,
गिरती है जब आसमान से।
ओम सिंह कक्षा एक

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