10:04 pm Wednesday , 4 November 2026
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निर्जन की जिज्ञासा है- Ravina

Ravina

निर्जन की जिज्ञासा है,
निर्झर की तुतली बोली में,
विटपों के हैं प्रश्नचिन्ह,
विहगों के वन्य ठिठोली में,
इंगित है कुछ प्रश्न पूंछ लूं,
इन्द्रचाप की रोली में,
संशय के दो कण लाई हूँ,
आज ज्ञान की झोली में।

शुभ प्रभात मित्रों।

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