अकेलेपन की आदत ने बिगाड़ा
मुझे मेरी ही संगत ने बिगाडा
नहीं टिकतीं किसी मंज़र पे नज़रें मेरी
आँखों को ह़ैरत ने बिगाड़ा
बनाया काम बदनामी ने कोई
तो कोई काम शोहरत ने बिगाड़ा
मिली बस चार दिन की ज़िंदगानी
हमें इतनी-सी मोहलत ने बिगाड़ा
करे भी तो करे किससे शिकायत
शुभ प्रभात दोस्तों
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