5:01 pm Wednesday , 4 November 2026
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ऊँ कृष्णाय नम:- Ravina

Ravina

यं हि न व्यथयन्येते पुरुषं पुरुषर्षभ।
समुद:खसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते।

:- जो पुरुष सुख तथा दु:ख में विचलित नहीं होता और इन दोनों में समभाव रखता है, वह निश्चित रूप से मुक्ति के योग्य है।

ऊँ कृष्णाय नम: ।
शुभ प्रभात मित्रों।

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