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आषाढ़ में बरसे भक्ति! 15 से मां की गुप्त साधना, 25 से हरि सोएंगे 4 मास।


उझानी-बदांयू 6 जुलाई।

आषाढ़ की पहली बूंदों के साथ ही धरती ही नहीं, मन भीग गया है। मंदिरों में शंखनाद, भजन-कीर्तन और धूप-अगरबत्ती की खुशबू से माहौल भक्तिमय हो उठा है। मानो देवता भी सावन के स्वागत में धरती पर उतर आए हों।

15 जुलाई, गुप्त नवरात्र का आगाज़,नौ दिन मां दुर्गा अपने गुप्त रूपों में साधकों को आशीर्वाद देंगी। दीप की लौ में, मंत्रों की गूंज में मां की कृपा बरसेगी।
16 जुलाई, जगन्नाथ की रथयात्रा जय जगन्नाथ के जयकारों से गूंजेगा आकाश। भगवान अपने भक्तों से मिलने रथ पर सवार होकर निकलेंगे।
वही 25 जुलाई, देवशयनी एकादशी- क्षीरसागर में शेषशय्या पर विराजेंगे श्रीहरि। साथ ही शुरू होगा चातुर्मास का पवित्र काल। 4 महीने तक सृष्टि के पालनहार विश्राम करेंगे।
29 जुलाई, गुरु पूर्णिमा-गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु, इस दिन शिष्य अपने गुरु के चरणों में श्रद्धा का जल अर्पित करेंगे।

आचार्य प्रवीण शर्मा कहते हैं – ये चार महीने संयम, सेवा और साधना के हैं। जब भगवान विश्राम पर हों, तब हम अपनी आत्मा को जागाएं। व्रत रखें, दान करें, सत्संग सुनें। विवाह और गृह प्रवेश जैसे सांसारिक काम रुक जाएंगे, पर भक्ति का रथ कभी नहीं रुकेगा।

आषाढ़ को पुण्य का महीना कहा गया है। इस महीने विष्णु और शिव का नाम लेने से, एक दीप जलाने से भी मोक्ष का मार्ग खुलता है।

तो चलिए, इस आषाढ़ माह की भक्ति में भीगते हैं… माला फेरते हैं, दीप जलाते हैं और अपने इष्ट को मनाते हैं।

राजेश वार्ष्णेय एमके।

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